Kanpur: तीन खंडों के खंड शिक्षाधिकारियों को नहीं चिंता है शिक्षकों के वेतन की, जानें त्योहारों से पहले सैलरी मिलेगी या नहीं, देखें क्या कहा लेखाधिकारी ने, बोले BSA “अब लापरवाही पर रुकेगा दोषियों का वेतन”, DM तक पहुंची शिकायत
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के तीन खंडों के खंड शिक्षाधिकारियों को अपने शिक्षकों के वेतन की कोई चिंता नहीं रहती है। एक तो हर महीने वेतन बिल देर से बनाते हैं, वहीं दूसरे अपनी गलती को स्वीकार भी नहीं करते और एक बार भी लेखाधिकारी से रिक्वेस्ट नहीं करते कि उनके खंड के शिक्षकों का वेतन रिलीज कर दिया जाए।
इस बात का खुलासा लेखाधिकारी शालिनि सिंह, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय (BSA) कानपुर नगर ने किया है। बाबुओं और खंड शिक्षाधिकारियों की हर महीने की हरकत से तंग आकर आक्रोशित लेखाधिकारी ने बताया है कि हर महीने सदर बाजार और प्रेमनगर का वेतन बिल देर से प्राप्त होता है। जबकि कई बार हर महीने की 28, 29 और 30 तारीख तक वेतन बिल जमा करने के लिए कहा जा चुका है। इस बार भी त्योहार होने की वजह से जल्द से जल्द वेतन बिल की मांग की गई थी, ताकि शिक्षकों का वेतन समय पर पहुंच जाए, लेकिन 2 अगस्त की शाम 5 बजे तक इंतजार करना पड़ा।
देर से बिल देने के बावजूद एक बार भी खंड शिक्षाधिकारियों की ओर से रिक्वेस्ट नहीं आई कि, शिक्षकों का वेतन रिलीज कर दिया जाए। हालांकि आज वेतन पास कर दिया गया है, सोमवार तक शिक्षकों के खातों में पहुंच जाएगा, लेकिन खंडशिक्षाधिकारियों की हर महीने की लापरवाही सुधरने का नाम नहीं ले रही है। उधर इस पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी (DM) तक शिकायत पहुंच गई है। उन्होंने इस पूरे मामले पर जांच बिठाकर कार्यवाही कराने की बात कही है।
देखें क्या कहा बीएसए ने
उधर इस पूरे मामले को लेकर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी सुरजीत सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों खंड शिक्षाधिकारियों को शाम सात बजे बुलाया है। इसी से साथ कहा है कि अगर अब समय पर ये वेतन बिल नहीं देंगे तो दोषी खंड शिक्षाधिकारियों और बाबुओं का वेतन रोक दिया जाएगा।
वेतन बिल समय पर न देने की ये है बड़ी वजह
प्रेमनगर और सदर बाजार के शिक्षकों ने बताया कि बाबू और खंड शिक्षाधिकारियों का लापरवाही की वजह से हर महीने उनका वेतन लेट होता है। एक शिक्षक ने बताया कि बाबू स्कूलों में फर्जी निरीक्षण करते हैं और फिर वेतन रोक देते हैं। इसके बाद वेतने देने के नाम पर घूस मांगते हैं। अगर शिक्षक घूस नहीं देते तो वो सभी शिक्षकों का वेतन बिल समय पर जमा नहीं करते हैं और इस तरह से शिक्षकों को परेशान किया जाता है। पूरे विभाग में भ्रष्टाचार हावी है, जिसकी वजह से शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। बता दें कि प्रेमनगर के खंड शिक्षाधिकारी दीपक अवस्थी और सदर बाजार के खंड शिक्षाधिकारी सौरभ आनन्द हैं।