Shailputri Maa: प्रथम मां शैलपुत्री को ऐसे पूजें…पढ़ें आरती औऱ मंत्र; कन्या को दें ये उपहार
Pratham Maa Shailputri: नवरात्र के पहले दिन यानी प्रतिपदा को मां भगवती के प्रथम रूप शैलपुत्री (Shailputri) की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस सम्बंध में शास्त्रों में दिया गया है कि, जिसे लक्ष्मी अर्थात धन की प्राप्ति करनी हो, वह नवरात्र के पहले दिन मां भगवती को पान और गुलाब की सात पंखुड़ियां अर्पित कर प्रसन्न कर सकता है। ऐसा करने से मां प्रसन्न होंगी और धीरे-धीरे आपके जीवन नें आर्थिक लाभ होने लगेगा। अगर पहले दिन यह कार्य न कर सकें तो नवरात्र के दौरान किसी भी दिन इस कार्य को किया जा सकता है।
इस तरह पड़ा प्रथम स्वरूपा माँ शैलपुत्री का नाम
नवरात्र के नौ दिन तक मां भगवती के नौ रूपों पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। पहले दिन मां भगवती के शैलपुत्री रूप की पूजा होती है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि माँ दुर्गा के 9 रूपों में प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री का है। एक कथा के अनुसार शैलराज हिमालय राज कि कन्या होने के कारण ही माँ का नाम शैलपुत्री पड़ा। माँ का यह रूप अति सुन्दर और भक्तो को सुख पहुंचाने वाला है। अगर मां की छवि की बात करें तो उन्होंने दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प ले रखा है। माँ वृषभ वाहन पर सवार रहती हैं।
इसलिए मां को कहा जाता है वृषारूढ़ा
माँ वृषभ वाहन पर सवार रहती हैं। इसलिए माँ को भक्त वृषारूढ़ा देवी कहकर भी बुलाते हैं। उनके हाथ में सुशोभित कमल पुष्प को अविचल ज्ञान और शांति का प्रतीक माना गया है। मां शैलपुत्री भी भगवान शंकर की तरह ही पर्वतों पर रहती हैं। प्रत्येक प्राणी में माँ का स्थान नाभि चक्र से नीचे स्थित मूलाधार चक्र में माना गया है। यही वह स्थान है जहां माँ कुंडलिनी के रूप में विराजमान रहती हैं। मान्यता है कि माँ की उपासना में योगी एवं साधक अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। इसी स्थान से योग साधना का आरम्भ भी माना गया है।
शक्ति प्रदान करता है मां का यह रूप
बता दें कि माँ का यह अद्भुत रूप साधक को साधना में लीन होने की शक्ति प्रदान करता है। साथ में ही साहस एवं बल और आरोग्य का वरदान देता है। सभी प्रकार के वन्य जीव-जंतुओं पर माँ की हमेशा कृपा बनी रहती है। शास्त्रों व पुराणों की मानें तो मां शैलपुत्री की जो पूजा करता है, उसे वह आकस्मिक व प्राकृतिक आपदाओं से भी मुक्त करती हैं। साथ ही भक्तों के जीवन में वैभव, धन, मान सम्मान और प्रतिष्ठा का धीरे-धीरे विकास होने लगता है। शनि की कुदृष्टि से बचने के लिए भी माँ कि पूजा कर सकते हैं।

पहले दिन एक कन्या को दें ये उपहार
वैसे तो लोग नवरात्र की अष्टमी और नवमी को कन्या भोज कराते हैं, लेकिन नवरात्र के प्रथम दिन से कन्या भोज कराने का भी विधान है। मान्यता है कि प्रथम शैलपुत्री की पूजा में सफेद और लाल रंग का फूल चढ़ायें। गाय के दूध से बने पकवान एवं मिष्ठान का भोग लगाएं। ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है और परिवार रोग मुक्त होता है। अगर माँ को प्रसन्न करना चाहते है तो एक कन्या को कंघा, हेयर ब्रश, हेयर क्रीम या बैंड उपहार मे दें। पिपरमेंट युक्त मीठे मसाले का पान, अनार या गुड़ से बने पकवान शैलपुत्री मां को बहुत पसंद है। हो सके तो ये भी मां को अर्पित कर सकते हैं।
मन्त्र
वंदे वांछित लाभाय चंद्रार्धकृत शेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम।
आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जय कार ।।
शिव शंकर की प्रिय भवानी ।
तेरी महिमा किसी ने न जानी ।।
पार्वती तू उमा कैहलावे।
जो तुझे सुमिरे सो सुख पावे।।
रिद्धि सिद्धि परवान करे तू।
दया करें धनवान करे तू ।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी ।।
उसकी सगरी आस पुजा दो ।
सगरे दुख तकलीफ मिटा दो ।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाये ।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाये।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे ।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपति भर दो।।
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।
ये भी पढ़ें-Navratri: पंचम स्कन्दमाता को लगाएं केले का भोग… विद्यार्थी करें ये सरल उपाय; मंत्र-आरती पढ़ें