Makar Sankranti-2023: मकर संक्रांति पर सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हुए बोलें ये 21 मंत्र, रोगों से बचने को बनाए इस तरह खिचड़ी, रात में न करें तिल का सेवन

January 14, 2023 by No Comments

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मकर संक्रांति विशेष। माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत वर्ष में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2023 को, दिन रविवार को मनाया जा रहा है। आचार्य विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि मकर संक्रान्‍ति का पुण्यकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। इस दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य अवश्य दें। कहते हैं कि इस दिन ऐसा करने से धन धान्य की वृद्धि होती है और सुख शांति बढ़ती है।

ये भी मान्यता है कि जो संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता। वह 7 जन्मों तक निर्धन और रोगी रहता है और जो संक्रांति का स्नान करता है वह तेजस्वी और पुण्यात्मा होता है। संक्रांति के दिन उबटन लगाये, जिसमे काले तिल का उपयोग हो। भगवान सूर्य को भी तिलमिश्रित जल से अर्घ्य दें।

इस तरह बनाएं खिचड़ी
मकर संक्रान्‍ति के दिन तिल गुड़ के व्‍यंजन और चावल में मूंग की दाल मिलाकर बनाई गई खिचड़ी का सेवन ऋतु-परिवर्तनजन्‍य रोगों से रक्षा करता है। इनका दान करने का भी विधान है।

जानें क्या है तिल का महत्व
मकर संक्रान्‍ति पर्व पर तिल के उपयोग का महत्व माना गया है। मकर संक्रांति में इन छह प्रकारों से तिलों का उपयोग करने से इहलोक और परलोक में वांछित फल प्राप्त होता है। अर्थात तिल का उबटन, तिलमिश्रित जल से स्‍नान, तिल-जल से अर्घ्य, तिल का होम, तिल का दान और तिलयुक्‍त भोजन। किंतु ध्‍यान रखें रात्रि को तिल व उसके तेल से बनी वस्‍तुएं खाना वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन तिल का दान पापनाश करता है, तिल का भोजन आरोग्य देता है, तिल का हवन पुण्य देता है।

पानी में भी थोड़े तिल डाल के पियें तो स्वास्थ्यलाभ होता है। तिल का उबटन भी आरोग्यप्रद होता है। इस दिन सुर्योदय से पूर्व स्नान करने से 10 हजार गौदान करने का फल होता है। जो भी पुण्यकर्म उत्तरायण के दिन करते हैं वे अक्षय पुण्यदायी होते हैं। तिल और गुड के व्यंजन, चावल और चने की दाल की खिचड़ी आदि ऋतु-परिवर्तनजन्य रोगों से रक्षा करती है। तिलमिश्रित जल से स्नान आदि से भी ऋतु-परिवर्तन के प्रभाव से जो भी रोग-शोक होते हैं, उनसे आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने में सफलता मिलती है।

सूर्य को अर्घ्य देने का पौराणिक मंत्र, अर्घ्य देने से पहले बोले
“जपा कुसुम संकाशं काश्यपेयम महाद्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर।।”

न करें नमक-मिर्च का उपयोग
मान्यता है कि माघ मास में नमक -मिर्च का उपयोग नहीं करना चाहिए।

करें ये कार्य
आदित्यह्रदय स्त्रोत्र का पाठ भी जरुर करें। संपूर्ण आदित्यहृदय स्तोत्र पाठ करें। गायत्री मंत्र का जप 108 बार जरुर करें। ‘पद्म पुराण’ में सूर्यदेवता का मूल मंत्र है, ॐ ह्रां ह्रीं स: सूर्याय नम:। इसका प्रतिदिन जप करना चाहिए।

सूर्य भगवान को अर्घ दें तो ये २१ मंत्र बोलें

ॐ सूर्याय नमः
ॐ रवये नमः
ॐ भानवे नमः
ॐ आदित्याय नमः
ॐ मार्तण्डाय नमः
ॐ भास्कराय नमः
ॐ दिनकराय नमः
ॐ दिवाकराय नमः
ॐ मरिचये नमः
ॐ हिरणगर्भाय नमः
ॐ गभस्तिभीः नमः
ॐ तेजस्विनाय नमः
ॐ सहस्त्रकिरणाय नमः
ॐ सहस्त्ररश्मिभिः नमः
ॐ मित्राय नमः
ॐ खगाय नमः
ॐ पूष्णे नमः
ॐ अर्काय नमः
ॐ प्रभाकराय नमः
ॐ कश्यपाय नमः
ॐ श्री सवितृ सूर्य नारायणाय नमः

सूर्य देव की आरती

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)