Health Tips: जानें क्या होती है पेट की गर्मी और इससे क्या-क्या होती है शारीरिक परेशानियां, जानें इसके लक्षण व उपाय
कहते हैं अगर पेट खराब तो समझो पूरी सेहत खराब। ऐसे में पेट को ठीक रखना सबसे जरूरी है, लेकिन हम इसका ही ध्यान नहीं रखते हैं और भी पेट की तमाम समस्याओं से हम जूझते रहते हैं। इसी में एक समस्या है पेट की गर्मी, इसकी वजह से हम शरीर की तमाम समस्याओं से ग्रसित हो जाते हैं और हम समस्या की जड़ तक नहीं पहुंच पाते। इस लेख में आयुर्वेदाचार्य रोहित यादव बता रहे हैं कि पेट की गर्मी क्या है और इसके लक्षण व उपायों पर भी दे रहे हैं जानकारी। साथ ही बता रहे हैं कि पेट की गर्मी दूर करने के लिए जरूरी है कि हम अपने खान-पान के तरीकों में बदलाव करें।
देखें पेट की गर्मी के लक्षण
छाती या सीने में जलन होना।
सांस लेने में तकलीफ होना।
मुंह में खट्टा पानी और खट्टी डकारें आना।
घबराहट और उल्टी जैसा महसूस होना।
पेट में जलन और दर्द होना।
गले में जलन होना।
पेट का फूल जाना (पेट में अफ़ारा होना)।
कब्ज होना।
सिर दर्द होना।
पेट में गैस का बनना।
पेट की गर्मी को दूर करने के उपाय या पेट को ठंडा रखने के उपाय
केला खाएं
पेट की गर्मी को शांत करके उसे ठंडा रखने में केला बहुत मदद करता है। केले के पोटेशियम की मात्रा पेट में बनने वाले एसिड को नियंत्रित करती है और केले का पीएच तत्व एसिड को कम करता है। साथ ही केला, पेट में एक चिकनी पर्त बना देता है जिससे एसिडिटी में कमी आती है। केले का फाइबर पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।
तुलसी के पत्तों का करें सेवन
तुलसी के पत्तों का सेवन करने से पेट में पानी की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट के अतिरिक्त ऐसिड में कमी आती है। इसे खाने से मिर्च-मसाले वाला खाना भी सरलता से पच जाता है। रोज खाने के बाद पाँच-छह तुलसी के पत्ते खाने से एसिडिटी नहीं होती है।
ठंडा दूध पियें
दूध का कैल्शियम, पेट के एसिड को एब्जॉर्ब करके उसे बहुत आसानी से ख़त्म कर देता है। रोज सुबह एक कप ठंडा दूध पेट को ठंडा रखने का रामबाण इलाज है।
सौंफ खाएं
खाना खाने के बाद सौंफ का सेवन इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि सौंफ की तासीर ठंडी होती है जो पेट की जलन और गरमी को शांत करती है। इसलिए अगर एसिडिटी की शिकायत ज्यादा हो तो सौंफ को पानी में उबालकर उसका सेवन करें। इससे काफी राहत मिलेगी।
इलायची खाएं
इलायची का स्वाद मीठा और इसकी तासीर ठंडी होती है। इस कारण यह पेट के अतिरिक्त एसिड को कम करके उसे ठंडा रखने में सहायक है।
खाएं ज़ीरा
आयुर्वेद में ज़ीरे को पेट के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसकी सहायता से पेट में लार बनती है जिससे खाना पचने में मदद मिलती है और एसिड न बनने के कारण पेट भी ठंडा रहता है।
पुदीने के पत्ते खाएं
पुदीने के पत्ते मुखवास के साथ ही पेट के एसिड को कम करके पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। इसलिए पुदीने के पत्ते ऐसे ही खा लें या फिर पानी में उबाल कर लें।
सूखी अदरक खाएं
अदरक, पाचन तंत्र को ठीक रखने के साथ शरीर को प्रोटीन भी देता है। इसके नियमित सेवन से अल्सर की गांठ नहीं होती और एसिड भी नहीं बनता है। पेट को ठंडा रखने के लिए सूखी अदरक को उत्तम खाद्य पदार्थ माना गया है।
लौंग का करें सेवन
लौंग के जूस से स्लाइवा बनता है जिससे खाना पचने में आसानी होती है और एसिडिटी भी नहीं होती है। खाना ठीक से पचने से पेट में आराम रहता है।
आंवला का करें सेवन
विटामिन सी का उत्तम सोर्स होने के कारण आंवला पेट की परेशानियों में भी काफी लाभकारी है। नियमित रूप से आंवले का सेवन करने से पेट में गर्मी नहीं होती है और पेट ठंडा रहता है।
ये उपाय भी पेट की गर्मी में देता है राहत
मुलेठी का चूर्ण पेट की गर्मी को मारता है।
त्रिफला का चूर्ण दूध के साथ पीने से पेट की जलन शांत होती है।
दूध में मुनक्का डालकर पीने से पेट ठंडा रहता है और गर्मी शांत होती है।
सौंफ, गुलाब और आंवला का चूर्ण, पेट की हर समस्या का रामबाण उपाय है।
3 लीटर पानी रोज़ पीना चाहिए। उसमे से एक लीटर सुबह खाली पेट पी लेना चाहिए।
खाने के साथ पानी नहीं पीना चाहिए। बल्कि खाने के एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए।
अगर पेट की कोई भी समस्या है तो चाय और कॉफ़ी पीना बंद कर दें।