Lucknow News: विष्णु और कामदेव की पूजा का दिन है बसंत पंचमी, छात्राओं ने जाना महत्व
लखनऊ। देश के 74वें गणतंत्र दिवस एवं बसंत पंचमी के अवसर पर बालिका विद्यालय में आयोजित समारोह में प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने बसंत ऋतु का वर्णन करते हुए कहा कि वसंत ऋतु का आगमन होते ही निसर्ग का कण-कण खिल उठता है। मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षी, खग-मृग सभी उल्लास से भर जाते हैं। नयी उमंग और चेतना से परिपूर्ण सबेरा सहलाते गुदगुदाते ऊर्जा और रचनात्मकता से भर देता है।
इस समय फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं हैं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ और भौंरे मँडराने लगते हैं। ऐसे वातावरण में वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता है जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता है। वसंत पंचमी (माघ शुक्ल ) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। जो महत्त्व विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है।
चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं। इसी संस्कृति और परंपरा का निर्वाह करने के लिए बालिका विद्यालय में बसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस का आयोजन धूमधाम से किया गया, जिसमें शिक्षिकाओं एवं छात्राओं द्वारा पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया गया। भारत माता की जय, वंदे मातरम के उद्घोष के साथ छात्राओं एवं शिक्षिकाओं द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई। प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र द्वारा ध्वजारोहण किया गया।
तत्पश्चात विद्यालय में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा पूजन कार्य संपन्न हुए। विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना कर उनके एवं महान देशभक्तों के चित्रों पर विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र के साथ समस्त शिक्षिकाओं तथा छात्राओं द्वारा माल्यार्पण तथा पुष्प अर्पित किए गए। छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने देश भक्ति गीत, कविता तथा नृत्य द्वारा समस्त वातावरण को देश भक्तिमय कर दिया। विद्यालय में ऐसे आयोजन का संपन्न होना सभी को अपने बचपन का स्मरण करा देता है जब सब लोग गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के झंडे फहराने का साक्षी बनने और लड्डू खाने का इंतजार किया करते थे। सबको आजीवन वही उत्साह बनाए रखते हुए अपने देश से प्रेम करना चाहिए और समर्पित होकर अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए। यही गणतंत्र दिवस की सच्ची बधाई और बसंत की खुशबू भरी शुभकामनाएं होंगी।
लखनऊ। देश के 74वें गणतंत्र दिवस एवं बसंत पंचमी के अवसर पर बालिका विद्यालय में आयोजित समारोह में प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने बसंत ऋतु का वर्णन करते हुए कहा कि वसंत ऋतु का आगमन होते ही निसर्ग का कण-कण खिल उठता है। मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षी, खग-मृग सभी उल्लास से भर जाते हैं। नयी उमंग और चेतना से परिपूर्ण सबेरा सहलाते गुदगुदाते ऊर्जा और रचनात्मकता से भर देता है।
इस समय फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं हैं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ और भौंरे मँडराने लगते हैं। ऐसे वातावरण में वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता है जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता है। वसंत पंचमी (माघ शुक्ल ) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। जो महत्त्व विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है।

चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं। इसी संस्कृति और परंपरा का निर्वाह करने के लिए बालिका विद्यालय में बसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस का आयोजन धूमधाम से किया गया, जिसमें शिक्षिकाओं एवं छात्राओं द्वारा पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया गया। भारत माता की जय, वंदे मातरम के उद्घोष के साथ छात्राओं एवं शिक्षिकाओं द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई। प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र द्वारा ध्वजारोहण किया गया।
तत्पश्चात विद्यालय में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा पूजन कार्य संपन्न हुए। विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना कर उनके एवं महान देशभक्तों के चित्रों पर विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र के साथ समस्त शिक्षिकाओं तथा छात्राओं द्वारा माल्यार्पण तथा पुष्प अर्पित किए गए। छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने देश भक्ति गीत, कविता तथा नृत्य द्वारा समस्त वातावरण को देश भक्तिमय कर दिया। विद्यालय में ऐसे आयोजन का संपन्न होना सभी को अपने बचपन का स्मरण करा देता है जब सब लोग गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के झंडे फहराने का साक्षी बनने और लड्डू खाने का इंतजार किया करते थे। सबको आजीवन वही उत्साह बनाए रखते हुए अपने देश से प्रेम करना चाहिए और समर्पित होकर अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए। यही गणतंत्र दिवस की सच्ची बधाई और बसंत की खुशबू भरी शुभकामनाएं होंगी।