Santan Saptami: संतान सप्तमी व्रत 18 सितम्बर को…क्या खाएं क्या न खाएं..पढ़ें व्रत पूजा विधि
Santan Saptami: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी का व्रत महिलाओं द्वारा रखा जाता है। महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं. शास्त्रों के मुताबिक इस व्रत का विधान दोपहर तक रहता है। पंडित रवि शास्त्री बताते हैं कि इस व्रत को मुक्ताभरण सप्तमी भी कहा जाता है. संतान सुख, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि के लिए इस व्रत को महिलाएं करती हैं.
पंडित रवि शास्त्री कहते हैं कि उदयातिथि के मुताबिक, संतान सप्तमी का व्रत 18 सितम्बर को करना अधिक शुभ है. वह कहते हैं कि सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें. इसके बाद परम्परागत पूजा करें. संतान गोपाल यानी मातृका की पूजा करें. कथा सुनें और व्रत का पालन करें. संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करें.
पूजन विधि
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि दोपहर को चौक पूजन कर चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, सुपारी तथा नारियल आदि से महादेव-पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन भोग के लिए खीर-पूड़ी तथा गुड़ के पुए भगवान को अर्पित किए जाते हैं। इसी के साथ ही संतान की रक्षा के लिए शिवजी को एक डोरा भी अर्पित किया जाता है। बाद में इसे शिवजी का वरदान मानते हुए धारण करने के बाद कथा सुनी जाती है। इसी के साथ इस दिन जाम्बवती के साथ श्यामसु्ंदर तथा उनके बच्चे साम्ब की भी पूजा करने का विधान धर्म पुस्तकों में दिया गया है। माताएं पार्वती जी का पूजन करके पुत्र प्राप्ति अथवा उसके अभ्युदय का वरदान मांगती हैं। इस व्रत को मुक्ताभरण भी कहते हैं।
डोरा अर्पित करते समय करें ये काम
डोरा अर्पित करते वक्त शिवजी से निवेदन करना चाहिए, हे प्रभु इस कुलवर्धनकारी डोरे को ग्रहण कीजिए।
क्या खाएं क्या न खाएं
पंडित रवि शास्त्री बताते हैं कि इस व्रत में फल, दूध,दही, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा यानी हल्का सात्विक भोजन करें. अनाज, दाल, तला-भुना, मसालेदार भोजन और प्याज आदि का सेवन न करें.
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)