Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर 30 साल बाद बना अद्भुत संयोग…भगवान श्रीकृष्ण ने जगत की भलाई के लिए निर्धारित किया था ये दिन

October 24, 2026 by No Comments

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Sharad Purnima 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक, शरद पूर्णिमा हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं. मान्यता है कि पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा 16 कलाओं में होता है. इसी दिन यमुना तट पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था. इसीलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं. इसे कोजागर व्रत और कौमुदी व्रत भी कहते हैं.

मान्यता है कि रासोत्सव का यह दिन वास्तव में भगवान श्री कृष्ण ने जगत की भलाई के लिए निर्धारित किया था. इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री के मुताबिक इस बार शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का उल्लेख किया जा रहा है. माना जाता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में किसी भी शुभ कार्य को शुरू किया जा सकता है तो वहीं हर्षण योग को प्रसन्नता और उत्साह से जोड़ा जाता है.

शरद पूर्णिमा की चांदनी में यानी खुले आकाश के नीचे खीर बनाकर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है. मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों के संपर्क में आने से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं और जब हम इसे खाते हैं तो इससे हमारा शरीर शरद ऋतु के लिए तैयार होता है. इसका वैज्ञानिक आधार भी है. इसके बारे में हमारी दूसरी खबर (इसी खबर में नीचे खबरों के दिए लिंक) में पढ़ें.

मां लक्ष्मी की होती है पूजा

धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इससे सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. यही वजह है कि अधिकांश भक्त रात जागरण कर माता की पूजा अर्चना करते हैं. इसी वजह से इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. माना जाता है कि रात जागरण करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है.

भगवान विष्णु की भी करें पूजा

मां लक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु की भी पूजा शरद पूर्णिमा पर करें. इस दिन मथुरा से लेकर देश के हर मंदिर और धार्मिक स्थलों पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.

शरद पूर्णिमा तिथि

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ- 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे
पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:41 बजे, इसीलिए स्नान-दान की पूर्णिमा इसी दिन है लेकिन शरद पूर्णिमा 25 को है.
चंद्रोदय का समय: शाम 5:00 बजे

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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