बता दें कि कफ सिरप के नियमों में बदलाव आधिकारिक गजट में प्रकाशित ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026’ के माध्यम से अधिसूचित किया गया है.
मध्य प्रदेश पुलिस ने मौतों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इसके अलावा, तमिलनाडु की दवा कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
दोनों बच्चों के इलाज भले ही अलग-अलग समय पर हुआ लेकिन डॉक्टर एक ही निकला।
छिंदवाड़ा के परासिया में जहरीला कफ सिरप पीने से 10 बच्चों की मौत हो गई थी.
इस सिरप की खोज 1950 के दशक के दौरान हुई थी और इसको कोडीन की आदत डालने वाली दवाओं का एक सुरक्षित विकल्प बताया गया था.
बच्चों की मौत के मामलों से जुड़े एक केस में लेप्टोस्पायरोसिस इंफेक्शन पाया गया. फिलहाल इसकी जांच अभी जारी है.