लोगों का कहना है कि अगर ब्लागर की कोई गलती थी तो उसे कानून के हिसाब से सजा देते. गाली-गलौज करना और पीटना ये कहां का इंसाफ है.

एक ओर इस वीडियो को भाजपा ने ‘‘शर्मनाक’’ बताया है और कहा है कि विपक्षी पार्टी मोदी पर निशाना साधने के लिए किस हद तक गिर सकती है. यह इसकी बानगी है.

सभी मामले प्रशासनिक लापरवाही या साइबर मजाक या फिर किसी बड़ी साजिश की ओर संकेत देते नजर आ रहे हैं. आवेदकों की मंशा भी ठीक नहीं लग रही है.

गृह विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जैसे ही जारी की गई, कई जिलों के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. इस फेरबदल में राज्य के अधिकांश प्रमंडल के डीएसपी प्रभावित हुए हैं.

किसी का कहना है कि ये बिहार है, यहां कुछ भी हो सकता है तो किसी का कहना है कि जब एम्बुलेंस ऐसी जगह इस्तेमाल की जाएगी तो भला मरीजों का क्या हाल होगा?

राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर लगातार चर्चा हो रही है तो वहीं अब लोगों का कहना है कि हाई कोर्ट में उनकी अपील का क्या परिणाम निकलता है.