कोरोना काल से ही गर्भगृह में प्रशासन की ओर से आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. यानी यहां पर आम श्रद्धालुओं को अभी भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है.
प्रत्यक्षदर्शी ने ये भी दावा किया है कि अगर समय पर प्रशासन की मदद मिल जाती तो बस में सवार लोगों को बचा सकते थे.
“यह क्या हो गया है नीतीश जी को? मानसिक स्थिति बिल्कुल ही अब दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो चुके हैं?”
अब तक कोई और होता तो पुलिस कार्रवाई कर चुकी होती. सारे नियम तो केवल गरीबों के लिए बने हैं.
ब्राह्मण समाज की महिलाओं पर लाठीचार्ज किया बल्कि इस कड़ाके की ठंड में वाटर कैनन से पानी की बौछार कर विरोध प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की.
यह एक औपचारिक पत्र है, न कि किसी सख्त कार्रवाई का प्रमाण।
इसमें जानवर की गलती नहीं है, गलती सरकार की है कि वो समय पर नसबंदी नहीं कराते.
सीपीआर देने वाले शख्स की जमकर प्रशंसा हो रही है और लोग कह रहे हैं कि समाज जागरुक हो रहा है.
वह ‘ब्रेनवॉश’ हो गया था और टास्क पूरा करने के दबाव में उसने ये हरकत कर दी.
मुसलमान रहते हुए भगवान के चरणों में रहिए. भगवान आपको इसी रूप में स्वीकार लेंगे. धर्मांतरण करने की जरूरत नहीं हैं