Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी की पढ़ें कथा, करें ये सरल उपाय, दूर होगा आर्थिक संकट, 3 प्वाइंट्स से जानें छोटी दीपावली का महत्व, पूजें भगवान श्रीकृष्ण को, करें तर्पण

October 20, 2022 by No Comments

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नरक चतुर्दशी स्पेशल। धनतेरस के दूसरे दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तो नरक चतुर्दशी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। इस बार छोटी दीपावली 23 अक्टूबर 2022 को है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन स्नान, ध्यान करने के बाद शाम को दीपदान करता है, उसे नरक में नहीं जाना पड़ता। मान्यता है कि नरक से बचने के लिए इस दिन सुबह तेल लगाकर अपामार्ग का पौधा जल में डालकर स्नान करना चाहिए।

घर के साथ शरीर भी करें स्वच्छ
इस पर्व का सम्बंध स्वच्छता से है। इसीलिए इस दिन घर की साफ-सफाई कर कूड़ा-कचरा घर के बाहर निकाला जाता है। इसी के साथ इस दिन अनिवार्य रूप से स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि जो इस दिन गंदा रहता है, वह पूरे वर्ष दरिद्र और दीनहीन बना रहता है। इसीलिए लोग इस दिन घर की साफ-सफाई करके घर का कूड़ा बाहर फेंक देते हैं। इस दिन शारीरिक स्वच्छता का भी बहुत महत्व है। सूर्योदय से पहले उठकर शरीर में तेल उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि जो सूर्योदय से पहले उठकर स्नान नहीं करते, वर्षभर संकट पीछा नहीं छोड़ता।

यमराज के नाम से करें तर्पण
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन स्नान करने के बाद तीन अंजुलि जल भरकर यमराज के निमित्त तर्पण करना चाहिए, जिनके पिता जीवित हैं, उन्हें भी यह तर्पण करना चाहिए। मान्यता है कि धनतेरस पर शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करने और नरक चतुर्दशी पर सुबह तर्पण करने से यमराज प्रसन्न होते हैं। इससे उस घर में न तो अकाल मृत्यु होता है और न ही नरक में जाना पड़ता है।

शाम को जलाएं इतने दीए
चूंकि इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं, इसलिए इस दिन शाम को भी दीपक जलाए जाते हैं। दीपक त्रयोदशी से लेकर अमावस्या तक जलाए जाते हैं। त्रयोदशी को यमराज के निमित्त एक दीपक जलाया जाता है। अमावस्या को दीपावली का पूजन किया जाता है। इन तीन दिनों में दीपक जलाने का यह कारण बताया जाता है कि इन दिनों भगवान वामन ने राजा बलि की पृथ्वी को नापा था। वामन भगवान ने तीन पगों में सम्पूर्ण पृथ्वी, पाताल तथा बलि के शरीर को नाप लिया था।

छोटी दीपावली को शाम को 11, 21 अथवा 31 दीपक जलाने का विधान शास्त्रों में दिया गया है। इनमें 5 अथवा 7 दीपक तो घी के जलाए जाते हैं और शेष तेल के। घी के एक-एक दीपक पूजा के स्थान पर, पानी रखने के स्थान पर, भंडारगृह और गौशाला में रखा जाता है। शेष दीपक विभिन्न स्थानों पर रख दिए जाते हैं। दीपक जलाते समय रोली, चावल, खील और बताशों से इनकी पूजा भी की जाती है।

मान्यता है कि त्रयोदशी, चतुर्दशी तथा अमावस्या को यम के लिए दीपक जलाकर लक्ष्मी पूजन के साथ दीपावली मनाते हैं। ऐसा करने से यम की यातना नहीं सहनी पड़ती और लक्ष्मी जी हमेशा साथ रहती हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा ने नरकासुर नामक दैत्य का संहार किया था।

पढ़ें कथा

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)