न पूछो प्यास मिट्टी की, जो बरसें प्रेम की बूंदें, चटकती भूमि के भीतर मिलन की भोर हो जाए…” सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया.

हरीश राणा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) में भर्ती थे और उनको उपशामक देखभाल वार्ड में रखा गया था.