इसी के साथ ही प्रेमानंद महाराज ने लोगों को संदेश दिया कि यदि वास्तव में जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाना चाहते हैं, तो वृंदावन आकर मनाएं।

इस विधि से ये विशेष रक्षासूत्र बांधने से भाई के साथ ही घर-परिवार को बुरी नजर नहीं लगती और भाई या फिर जो भी ये रक्षासूत्र बांधता है, वह हमेशा स्वस्थ्य रहता है और दीर्घायु होता है.

भद्रा को लेकर आचार्य कमलकांत कुलकर्णी ने कहा कि इस साल 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से मध्य रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर भद्रा समाप्त हो रही है.

मंगलवार के दिन व्रत का सामान खरीदने के लिए शास्त्रों में अशुभ माना गया है. इसलिए खरीदारी के लिए अन्य दिन चुनना ही बेहतर रहेगा। खासतौर पर रविवार या फिर गुरुवार को व्रत का सामान खरीदना श्रेष्ठ रहता है.

बुध ग्रह, संबंधों को परिपक्व बनाने में भी सहयोग करता है. इस ग्रह का प्रभाव से पारिवारिक संबंध अच्छे बने रहते हैं. नए संबंध में सफलता प्राप्त करने में सहयोग करता है.

संसार की सम्पूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है। इस पर्व को श्रद्धा भाव से करें अंधविश्वास के आधार पर नहीं। क्योंकि गुरु की दी हुई विद्या सिद्ध और सफल होती है।

इस व्रत के प्रभाव के बारिश जरूर होगी. यह उपाय सुनने के बाद राजा वापस अपने राज्य में लौट आए और फिर चारों वर्णों के साथ मिलकर इस एकादशी का विधि पूर्वक व्रत किया