Baikunth Chaturdashi-2022: बैकुण्ठ चतुर्दशी पर इस विधि से करें भगवान बैकुण्ठनाथ की पूजा, पढ़ें कथा
कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को बैकुण्ठ चतुर्दशी कहते हैं। कहीं-कहीं बैकुण्ठ चतुर्दशी मार्ग शीर्ष शुक्ल चतुर्दशी को भी मनाया जाता है। इस बार चतुर्दशी सोमवार 7 नवम्बर को पड़ रही है।
इस दिन व्रत रखकर भगवान बैकुण्ठनाथ का पूजन किया जाता है और सवारी निकाली जाती है। कहीं-कहीं मंदिरों में बैकुण्ठ द्वार बने होते हैं, जिसे इस दिन खोला जाता है और इसी से भगवान की सवारी निकलती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान की सवारी के साथ बैकुण्ठ दरवाजे में से निकलने वाले व्यक्ति पर भगवान की कृपा बनी रहती है और वह बैकुण्ठ जाने का अधिकारी हो जाता है।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन बैकुण्ठवासी भगवान (विष्णु) की विधिवत पूजा करके तथा स्नान, आचमन कराके बाल भोग लगाना चाहिए। इसके बाद पुष्प, दीप, चंदन आदि सुगंधित पदार्थों से आरती उतारनी चाहिए। वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देनी चाहिए। मान्यता है कि इस पूजा को करने से व्यक्ति को बैकुण्ठ धाम मिलता है। अर्थात व्यक्ति सीधा स्वर्ग जाता है।
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