श्रमिक असगर खां ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार को धन्यवाद है.
सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा है कि ऐसे काम देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतार सकते हैं.
जिस अंदाज़ और जिस काईयाँ हँसी के साथियों यह कह रहे हैं वो उनकी घटिया, बेहूदा और महिला विरोधी सोच दिखाता है.
कोरोना काल से ही गर्भगृह में प्रशासन की ओर से आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. यानी यहां पर आम श्रद्धालुओं को अभी भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है.
धमकाते हुए लहजे में उसने कहा कि बाद में यह मत कहना कि चेतावनी नहीं दी गई थी.
प्रत्यक्षदर्शी ने ये भी दावा किया है कि अगर समय पर प्रशासन की मदद मिल जाती तो बस में सवार लोगों को बचा सकते थे.
“यह क्या हो गया है नीतीश जी को? मानसिक स्थिति बिल्कुल ही अब दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो चुके हैं?”
ब्राह्मण समाज की महिलाओं पर लाठीचार्ज किया बल्कि इस कड़ाके की ठंड में वाटर कैनन से पानी की बौछार कर विरोध प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की.
यह एक औपचारिक पत्र है, न कि किसी सख्त कार्रवाई का प्रमाण।