रामायण की कथा तो हजारों साल पुरानी है, लेकिन रावण पुतला दहन की परंपरा को व्यापक रूप से मान्यता स्वतंत्रता के बाद ही मिली.
एडीएम सिटी योगानंद पांडे ने इसको लेक स्पष्ट किया कि रावण दहन इस बार गैर पारंपरिक रूप में होना था, इसलिए इसे अनुमति नहीं दी गई है.
अगर किसी व्रती महिला के साथ ऐसी कोई भी स्थिति बनती है तो उसे इस पूजन से दूर रहना चाहिए. घर के किसी अन्य सदस्य से कन्या पूजन करवा सकती हैं.
इस दिन कन्याओं को मिठाई, कोल्ड क्रीम आदि भेंट करना शुभ माना गया है। बता दें कि देवी कुष्मांडा की पूजा करने से पहले हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर इस मंत्र का जाप करें।
गुरुवार को अगर माता का प्रस्थान हो रहा है. तो यह नर वाहन अर्थात पालकी पर प्रस्थान माना गया है. इसको देश-विदेश में संतुलित और मध्यम परिणाम देने वाला माना गया है. इस बार माता गुरुवार को यानी पालकी पर प्रस्थान कर रही हैं.
इस ग्रहण का भारत पर क्या असर होगा और इसके उपाय क्या हैं को लेकर ज्योतिषाचार्य पंडित हरेंद्र उपाध्याय ने अपने बयान में कहा है कि 22 सितम्बर से नवरात्रि का शुभारम्भ हो रहा है. देवी की उपासना करें.
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं पूजा-पाठ न करें और न ही भोजन करें और सोने से भी बचें.
अगर कोई व्यक्ति सपने में अपने पूर्वजों को सिर पर हाथ फेरते हुए देखता है तो इस सपने को बहुत ही शुभ माना जाता है।
जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग।
जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग॥