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माता देवकी तो उनको लाला ही कहा करती थीं तो ब्रज की गलियों में लाला ही उनको कहा जाता है और मुरारी नाम से भी लोग बुलाते हैं.

इसी के साथ ही प्रेमानंद महाराज ने लोगों को संदेश दिया कि यदि वास्तव में जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाना चाहते हैं, तो वृंदावन आकर मनाएं।

इस विधि से ये विशेष रक्षासूत्र बांधने से भाई के साथ ही घर-परिवार को बुरी नजर नहीं लगती और भाई या फिर जो भी ये रक्षासूत्र बांधता है, वह हमेशा स्वस्थ्य रहता है और दीर्घायु होता है.

आजकल गर्लफ्रैंड और बायफ्रैंड के चलन पर भी कटाक्ष किया था और हर रोज लड़के बदलने वाली लड़कियों को प्रॉस्टीट्यूट कहकर सम्बोधित किया था.

भद्रा को लेकर आचार्य कमलकांत कुलकर्णी ने कहा कि इस साल 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से मध्य रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर भद्रा समाप्त हो रही है.

प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में महीजित नाम का एक धर्मात्मा राजा शासन करता था. वह बहुत ही शांतिप्रिय, दानवीर और ज्ञानी थी.