Makar Sankranti-2023: जानें मकर संक्रांति का पुण्य व महापुण्य काल का समय, अगर न जा सकें गंगा स्नान को, तो करें ये सरल कार्य, अवश्य निकालें ये दो दान, देखें क्या कहते हैं पुराण
मकर संक्रांति विशेष। माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत वर्ष में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2023, दिन रविवार को मनाया जा रहा है। आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि मकर संक्रांति, पर पुण्यकाल, सूर्योदय से सूर्यास्त तक है।
वह कहते हैं कि यह सूर्य की उपासना का पर्व है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर खरमास की भी समाप्ति हो जाती है और सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं और ऐसे शुभ संयोग में मकर संक्रांति पर स्नान, दान, मंत्र जप और सूर्य उपासना से अन्य दिनों में किए गए दान-धर्म से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति का पुण्य और महापुण्य काल समय
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी 2023 शनिवार को रात्रि 02:45 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
पुण्य काल का समय, 15 जनवरी रविवार क प्रातः 06:43 से सायं 05:17 तक होगा।
महा-पुण्य काल का समय, 15 जनवरी, दिन रविवार को सुबह 06:43 से 09:00 तक होगा।
जानें पुण्य-महापुण्य काल का महत्व
मकर संक्रांति पर पुण्य और महापुण्य काल का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं। मकर संक्रांति के पुण्य और महापुण्य काल में गंगा स्नान, सूर्योपासना,दान, मंत्र जप करने से व्यक्ति के जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है।
स्नान
मकर सक्रांति वाले दिन सबसे पहले प्रातः किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि यह संभव ना हो सके तो अपने नहाने के जल में थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान करें।
इस तरह करें सूर्योपासना
प्रातः स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के पात्र में जल, गुड़, लाल पुष्प, गुलाब की पत्तियां, कुमकुम, अक्षत आदि मिलाकर जल अर्पित करें।
गायत्री मंत्र जप
सूर्य उपासना के बाद में कुछ देर आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के जप करने चाहिए, अपने इष्ट देवी- देवताओं की भी उपासना करें।
गाय के लिए दान
पूजा उपासना से उठने के बाद गाय के लिए कुछ दान अवश्य निकालें जैसे- गुड, चारा आदि।
पितरों को भी करे याद
इस दिन अपने पूर्वजों को प्रणाम करें, उनके निमित्त कुछ दान अवश्य निकालें। इस दिन पितरों को तर्पण करना शुभ होता है। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गरीब व जरूरतमंदों के लिए दान
इस दिन गरीब व जरूरतमंदों को जूते, चप्पल, (चप्पल-जूते चमड़े के नहीं होने चाहिए) अन्न, तिल, गुड़, चावल, मूंग, गेहूं, वस्त्र, कंबल, का दान करें। ऐसा करने से शनि और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।
परंपराओं का भी रखें ध्यान
मकर सक्रांति का त्यौहार मनाने में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग परंपराएं हैं, अतः आप अपनी परंपराओं का भी ध्यान रखें। अर्थात अपने क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार मकर संक्रांति का त्यौहार मनाए।
मकर संक्रांति-नारद पुराण के अनुसार
“मकरस्थे रवौ गङ्गा यत्र कुत्रावगाहिता । पुनाति स्नानपानाद्यैर्नयन्तीन्द्रपुरं जगत् ।।”
सूर्य के मकर राशि पर रहते समय जहाँ कहीं भी गंगा में स्नान किया जाय , वह स्नान आदि के द्वारा सम्पूर्ण जगत् को पवित्र करती और अन्त में इन्द्रलोक पहुँचाती है।

पद्मपुराण के सृष्टि खंड अनुसार
मकर संक्रांति में स्नान करना चाहिए। इससे दस हजार गोदान का फल प्राप्त होता है। उस समय किया हुआ तर्पण, दान और देवपूजन अक्षय होता है।
गरुड़पुराण के अनुसार
मकरसंक्रान्ति, चन्द्रग्रहण एवं सूर्यग्रहण के अवसर पर गयातीर्थ में जाकर पिंडदान करना तीनों लोकों में दुर्लभ है।
मकर संक्रांति के दिन लक्ष्मी प्राप्ति व रोग नाश के लिए गोरस (दूध, दही, घी) से भगवान सूर्य, विपत्ति तथा शत्रु नाश के लिए तिल-गुड़ से भगवान शिव, यश-सम्मान एवं ज्ञान, विद्या आदि प्राप्ति के लिए वस्त्र से देवगुरु बृहस्पति की पूजा महापुण्यकाल / पुण्यकाल में करनी चाहिए।
मकर संक्रांति के दिन तिल (सफ़ेद तथा काले दोनों) का प्रयोग तथा तिल का दान विशेष लाभकारी है। विशेषतः तिल तथा गुड़ से बने मीठे पदार्थ जैसे की रेवड़ी, गजक आदि। सुबह नहाने वाले जल में भी तिल मिला लेने चाहिए।
कर्कटावस्थिते भानौ दक्षिणायनमुच्यते।उत्तरायणम्प्युक्तं मकरस्थे दिवाकरे।।(विष्णु पुराण, द्वितीयांशःअध्यायः8)
सूर्य के कर्क राशि में उपस्थित होने पर दक्षिणायन कहा जाता है और उसके मकर राशि पर आने से उत्तरायण कहलाता है।
धर्मसिन्धु के अनुसार
तिलतैलेन दीपाश्च देया: शिवगृहे शुभा:। सतिलैस्तण्डुलैर्देवं पूजयेद्विधिवद् द्विजम्।। तस्यां कृष्ण तिलै: स्नानं कार्ये चोद्वर्त्नम तिलै: . तिला देवाश्च होतव्या भक्ष्याश्चैवोत्तरायणे
उत्तरायण के दिन तिलों के तेल के दीपक से शिवमंदिर में प्रकाश करना चाहिए , तिलों सहित चावलों से विधिपूर्वक शिव पूजन करना चाहिए। ये भी बताया है की उत्तरायण में तिलों से उबटन, काले तिलों से स्नान, तिलों का दान, होम तथा भक्षण करना चाहिए।
अत्र शंभौ घृताभिषेको महाफलः वस्त्रदानं महाफलं
मकर संक्रांति के दिन महादेव जी को घृत से अभिषेक (स्नान) कराने से महाफल होता है। गरीबों को वस्त्रदान से महाफल होता है।
अत्र क्षीरेण भास्करं स्नानपयेव्सूर्यलोकप्राप्तिः
इस संक्रांति को दूध से सूर्य को स्नान करावै तो सूर्यलोक की प्राप्ति होती है।
नारद पुराण के अनुसार “क्षीराद्यैः स्नापयेद्यस्तु रविसंक्रमणे हरिम्।स वसेद्विष्णुसदने त्रिसप्तपुरुषैः सह।।”
जो सूर्यकी संक्रान्ति के दिन दूध आदि से श्रीहरि को नहलाता है, वह इक्कीस पीढ़ियों के साथ विष्णु लोक में वास करता है।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)