सरकार अनुदेशको की भर्ती करने जा रहे हैं जिनका कार्य प्री प्राइमरी के बच्चों के साथ रहकर उनको ऐसा तैयार करे कि जब बच्चा कक्षा1 में जाये तो बच्चे को स्कूल जाने के नाम पर भय न लगे।

परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्रियान्वयन के लिए गतिमान एआरपी चयन प्रक्रिया में वर्तमान में नियुक्त एआरपी को भी शामिल किया जाए.

ये भी बताया गया है कि अगर आने वाले समय में एक-एक कर सभी सरकारी स्कूल, सरकार अस्पताल आदि बंद कर दिए जाएंगे तो आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर, किसानों के बच्चे कहां पढ़ेंगे और कैसे इलाज कराएंगे.

आखिर क्या कारण हैं कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षकों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है?