मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के उदासीन रवैये से क्षुब्ध होकर…
बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने शासनादेश जारी कर दिया है.
घटना की सूचना के बाद से ही मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया है. तो वहीं पूरे शिक्षा विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई है.
सरकार अनुदेशको की भर्ती करने जा रहे हैं जिनका कार्य प्री प्राइमरी के बच्चों के साथ रहकर उनको ऐसा तैयार करे कि जब बच्चा कक्षा1 में जाये तो बच्चे को स्कूल जाने के नाम पर भय न लगे।
अब मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्रियान्वयन के लिए गतिमान एआरपी चयन प्रक्रिया में वर्तमान में नियुक्त एआरपी को भी शामिल किया जाए.
हाईकोर्ट ने कई बार ये आदेश दिया है कि इन कार्यों में अध्यापकों को न लगाएं फिर भी बड़ी संख्या में बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को लगाया जा रहा है.
ये भी बताया गया है कि अगर आने वाले समय में एक-एक कर सभी सरकारी स्कूल, सरकार अस्पताल आदि बंद कर दिए जाएंगे तो आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर, किसानों के बच्चे कहां पढ़ेंगे और कैसे इलाज कराएंगे.
आखिर क्या कारण हैं कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षकों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है?