सनातन हिंदू एकता पदयात्रा प्रसिद्ध छतरपुर मंदिर से 7 नवंबर को शुरू हुई थी और इसका समापन 16 नवंबर के दिन वृंदावन श्री बांके बिहारी मंदिर में होगा.
फूल और दीयों को 7 जगहों पर रख दें. इनमें से एक दीया शिव के मंदिर के पास, आंवले के पेड़ के नीचे
इस दिन शाम के समय लक्ष्मीनारायण की विधि-विधान से पूजा और आरती की जाती है.
गोबर-गोमूत्र, गंगाजल, दूध-दही, पंचामृत और तुलसी-हल्दी मिलाकर मोहम्मद खान का स्नान कराया. इसके बाद मुंडन संस्कार हुआ.
वृंदा वृंदावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नन्दनी तुलसी और कृष्णजीवनी, ये तुलसी के 8 प्रिय नाम हैं। जो कोई भी तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, वह अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त करता है।
अगर आप जीवन में अखंड सुख, सौभाग्य और संतान प्राप्ति की मनोकामना रखते हैं तो आप तुलसी विवाह वाले दिन शाम के समय में भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह कराएं और तुलसी की पूजा करें.
जो लोग मेरे साथ तुम्हारा विवाह करेंगे, वो मोक्ष को प्राप्त होंगे। तभी से शालिग्राम और तुलसी विवाह की परम्परा चली आ रही है।
आप दिन-रात जागा करते हैं और अगर सो जाते हैं तो लाखों-करोड़ों वर्ष तक के लिए सो जाते हैं।
उठो देवा बैठो देवा, अंगुलिया चटकाओ देवा
आषाढ़ में सोए देवा, कार्तिक में जागे देवा
हिंदू आध्यात्मिक एवम सेवा संस्थान कानपुर नगर के अध्यक्ष संजीव दीक्षित ने बताया कि “आज अतिथि सत्कार की भावना लगभग समाप्त हो चुकी है.