सहरी और इफ्तार का समय कुछ शहरों में अलग-अलग कुछ मिनट के लिए आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय मस्जिद या आधिकारिक कैलेंडर से समय की पुष्टि करने के बाद ही सहरी और इफ्तार करें.

फोरेंसिक टीमों को यह तय करना होगा कि यह आत्मघाती हमला था या प्लांट किया गया बम?

पिछली सुनवाई के दौरान हुई बहस पूरी होने पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की सिंगल बेंच ने सुनाया.