Sakat Chauth-2023: जानें सकट चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये गलती, करें ये 11 कार्य, पढ़ें कथा

January 8, 2023 by No Comments

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सकट चौथ स्पेशल। माघ कृष्ण चतुर्थी को सकट चौथ मनाया जाता है। इस बार सकट चौथ 10 जनवरी दिन मंगलवार को पड़ रहा है। संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए माताएं इस व्रत को करती हैं। पं. रवि शास्त्री बताते हैं कि यह व्रत हर साल माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन पड़ता है।

ganesh chaturthi

इसे सकट चौथ के अलावा संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट, माघ चतुर्थी भी कहते हैं। मान्यता है कि सकट चौथ के दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से सभी कष्टों का अंत होता है संतान के जीवन में आने वाली सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार सकट चौथ का व्रत माता पार्वती ने कार्तिकेय से मिलने और भगवान शंकर ने माता पार्वती को खुश करने के लिए किया था। आइये जानते है, साल 2023 के सकट चौथ व्रत की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल सकट चौथ 10 जनवरी 2023 को पड़ रहा है। 10 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन यानी 11 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 31 मिनट इसका समापन होगा। वैसे तो सकट चौथ के लिए उदया तिथि 11 जनवरी को प्राप्त हो रही है, लेकिन सकट चौथ पर चंद्रमा की पूजा का खास विधान है, इसलिए व्रत 10 जनवरी को ही किया जाएगा। सकट चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 42 मिनट पर है। इसी समय चंद्रमा की पूजा कर व्रत का पारण किया जाएगा।

सकट चौथ की पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
व्रती महिलाओं को लाल या पीले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए।
स्नान के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।
भगवान गणेश के साथ मां लक्ष्मी की भी मूर्ति रखें।
इसके बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
सबसे पहले गणेश जी और मां लक्ष्मी को रोली और अक्षत लगाएं।
उसके बाद फूल दूर्वा, मोदक भगवान गणेश को चढ़ाएं।
सकट चौथ पर तिल का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग अवश्य लगाएं।
इसके बाद “ऊं गं गणपतये नम:” मंत्र का जाप करें।
अंत में सकट चौथ व्रत की कथा सुनें और आरती करें।
रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर सकट चौथ व्रत का पारण करें।

पूजा में भूलकर भी न करें ये गलती
भगवान गणेश की पूजा में भूलकर भी तुलसी दल का इस्तेमाल न करें। एक कथा के मुताबिक तुलसी ने गणेश की तपस्या भंग की थी, जिसके बाद भगवान ने तुलसी को अपनी पूजा में शामिल नहीं करने का श्राप दिया था। व्रती महिलाओं को काले रंग का कपड़ा नहीं पहनना चाहिए। व्रती महिलाओं को कंदमूल वाले फल या सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।


पढ़ें कथा

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)