प्रत्यक्षदर्शी ने ये भी दावा किया है कि अगर समय पर प्रशासन की मदद मिल जाती तो बस में सवार लोगों को बचा सकते थे.
दोनों आम श्रद्धालुओं की तरह ही महाराज जी की बातें सुनते रहे और लगातार मुस्कुराते दिखाई दिए.
आईपीएस अधिकारी को वह पहचानते नहीं थे और न ही उनके पास कोई अनुमति थी. मालूम हो कि आज मेसी का मुंबई में कार्यक्रम है.
“यह क्या हो गया है नीतीश जी को? मानसिक स्थिति बिल्कुल ही अब दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो चुके हैं?”
अब तक कोई और होता तो पुलिस कार्रवाई कर चुकी होती. सारे नियम तो केवल गरीबों के लिए बने हैं.
ब्राह्मण समाज की महिलाओं पर लाठीचार्ज किया बल्कि इस कड़ाके की ठंड में वाटर कैनन से पानी की बौछार कर विरोध प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की.
यह एक औपचारिक पत्र है, न कि किसी सख्त कार्रवाई का प्रमाण।
इस मामले में ज्यूरी ने टिप्पणी देते हुए कहा कि कंपनी को सालों से टैल्क प्रोडक्ट्स के जोखिम के बारे में जानकारी थी फिर भी कंपनी ने उपभोक्ताओं को कोई चेतावनी नहीं दी.
इसमें जानवर की गलती नहीं है, गलती सरकार की है कि वो समय पर नसबंदी नहीं कराते.
सीपीआर देने वाले शख्स की जमकर प्रशंसा हो रही है और लोग कह रहे हैं कि समाज जागरुक हो रहा है.