Makar Sankranti-2026: मकर संक्रांति पर इन मंत्रों का करें जाप…मिलेगा पुण्य; स्नान-दान करें इस दिन

January 13, 2026 by No Comments

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Makar Sankranti-2026: इस साल यानी 2026 में मकर संक्रांति गुरुवार, 15 जनवरी को मनाई जाएगी. 14 जनवरी को एकादशी पड़ रही है तो वहीं ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी 2026 की रात्रि 09:39 बजे से शुरू होकर 15 जनवरी को दोपहर 01:39 बजे तक रहेगा. इस कारण 15 जनवरी को पूरे दिन पर्व शास्त्र सम्मत माना गया है. इस दिन माघ कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि है और इसी दिन खरमास की समाप्ति भी हो जाएगी.

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. यानी पूरे वर्ष में यही एक विशेष दिन होता है, जब सूर्यदेव अपने पुत्र शनि के घर प्रवेश करते हैं. इस वजह से सनातन धर्म में इस पर्व का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और अधिक बढ़ जाता है.

तिल का दान करने की है परम्परा

इस दिन प्रातःकाल गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने की परम्परा है. तो वहीं स्नान के बाद तिल, अन्न एवं वस्त्र व खिचड़ी आदि का दान करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है. इससे पुण्यफल की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति पर खिचड़ी, दही-चूड़ा और तिल से बने व्यंजन खाने व खिलाने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि, मकर संक्रांति के दिन सूर्य और शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए गुड़, तिल और गर्म कपड़े आदि का दान किया जाता है. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन विधिपूर्वक भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करने से परिवार में खुशहाली बनी रहती है और स्वास्थ्य उत्तम रहने के साथ यश-कीर्ति में वृद्धि होती है।

सूर्य उपासना का है पर्व

बता दें कि सनातन धर्म में मकर संक्रांति के दिन को सूर्य देव की उपासना का खास पर्व माना गया है. इस दिन सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने पर मांगलिक कार्यों का शुभारम्भ हो जाता है. खास बात ये है कि ये एक ऐसा पर्व है जो पूरे देश में एक साथ मनाया जाता है बस नाम अलग-अलग होते हैं. इसे देश भर के हर राज्य में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है और अलग-अलग तरह से मनाया जाता है. मकर संक्रांति को उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के नाम से भी जानते हैं. उत्तर प्रदेश में इस दिन उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी बनाने की परम्परा है. कहते हैं खिचड़ी के चार यार, दही, पापड़, घी और अचार.

भगवान सूर्यदेव के मंत्र

1- एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।

अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर।।

2- ॐ ॐ ॐ ॐ भूर् भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।

शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम।

विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।

लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।”

सूर्याष्टकम

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।

दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते

सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।

श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।

प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बन्धुकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।

एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजः प्रदीपनम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

सूर्य कवच

श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।

शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।

ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत्।।

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।

नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर:।।

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।

जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित:।।

सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।

दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:।।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।

सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति।।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।

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