Makar Sankranti: क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति… जानें क्या है मान्यता?
Makar Sankranti: मकर संक्रांति का पर्व एक ऐसा पर्व है जिसे पूरे देश में अलग-अलग नामों के साथ धूम-धाम से मनाया जाता है. इस बार यह त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा. वैसे तो 14 जनवरी को यह त्योहार मनाया जाता रहा है लेकिन इस बार मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी 2026 की रात्रि 09:39 बजे से शुरू हो रहा है जो कि 15 जनवरी को दोपहर 01:39 बजे तक रहेगा.
सनातन धर्म में किसी भी त्योहार जो कि सुबह का है, उसे उदयातिथि के हिसाब से मनाते हैं. चूंकि मकर संक्रांति सूर्य उपासना और स्नान-दान का त्योहार है जो कि प्रात:काल ही किया जाता है, इसलिए 15 जनवरी को पूरे दिन पर्व शास्त्र सम्मत माना गया है.
इसी दिन खरमास की समाप्ति भी हो जाएगी. उत्तर भारत में इसे खिचड़ी कहते हैं और इस दिन उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर खाए जाने की परम्परा है. जबकि गुजरात में यह पर्व पतंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है. अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार देश भर में इस त्योहार को अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है और पूरे देश में इस दिन अलग-अलग पकवान बनते हैं. विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है, इसलिए उत्तर भारत में इस पर्व को ‘खिचड़ी ‘के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्रांति पर बेहद महत्व है. माना जाता है कि इस दिन दान करना पुण्यदायी होता है. विशेषकर इस दिन तिल, खिचड़ी, गुड़ एवं कंबल आदि का दान करने का महत्व बताया गया है.
प्रचलित मान्यता
अक्सर लोग ये पूछते हैं कि मकर संक्रांति का पर्व क्यों मनाया जाता है ? इसको लेकर आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं. मान्यता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था.
उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी. इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है और गंगा स्नान करने का भी विधान बताया गया है. इसीलिए मकर संक्रांति मनाई जाती है. तो वहीं आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि, इस दिन की शुभता का पता इसी से चलता है कि महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था.
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।
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