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रामायण की कथा तो हजारों साल पुरानी है, लेकिन रावण पुतला दहन की परंपरा को व्यापक रूप से मान्यता स्वतंत्रता के बाद ही मिली.

एडीएम सिटी योगानंद पांडे ने इसको लेक स्पष्ट किया कि रावण दहन इस बार गैर पारंपरिक रूप में होना था, इसलिए इसे अनुमति नहीं दी गई है.

29 सितंबर यानी कल शाम करीब 7:30 बजे, नंद नगरी थाने की गश्ती टीम डिस्ट्रिक्ट पार्क के पास नियमित गश्त कर रही थी।

अगर किसी व्रती महिला के साथ ऐसी कोई भी स्थिति बनती है तो उसे इस पूजन से दूर रहना चाहिए. घर के किसी अन्य सदस्य से कन्या पूजन करवा सकती हैं.

भारतीय टीम एक तरफ खड़ी थी और काफी देर तक ड्रेसिंग रूम में रहने वाली पाकिस्तानी टीम भी बाहर आकर दूसरी तरफ खड़ी रही।